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पंचकोसीय परिक्रमा के अंतिम दिन आयोजित हुये भण्डारे

प्रदेश महामंत्री व विधायक ज्ञान तिवारी ने वितरण किया भण्डारा

कौशलेंद्र त्रिपाठी

मिश्रिख/ दधीचि कुण्ड तीर्थ की अन्तिम दिन श्रद्धालुओं ने अपना संकल्प पूर्ण किया।दधीचि कुंड का महत्व: महर्षि दधीचि के अस्थिदान की साक्षी रही इस भूमि पर होली के इस उत्सव को विजय और त्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।

प्रशासनिक सतर्कता भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और मेला प्रशासन मुस्तैद रहा।भक्ति भाव और उल्लास की होली दधीचि

कुंड के चारों ओर साधु-संतों और श्रद्धालुओं की टोली ने लोक गीतों और भजनों पर नृत्य किया। आतिशबाजी का यह नजारा देखने के लिए लोग छतों और कुंड के घाटों पर डटे रहे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस वर्ष की आतिशबाजी परिक्रमा मेले के इतिहास की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में से एक रही।

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विकास मिश्रा,बीनू के लगातार पाँच दिनो तक चले भन्डारे का आज विधिविधान से समापन हो गया।पूडी,सब्जी,खीर,पांचो दिनो तक लगातार भंडारा बदल बदल कर होता रहा।जिसमें आज दंडी स्वामियों को विद विधान से फल मिष्ठान,बर्तनदक्षिणा,अंग वस्त्र भेट की गई।ये गुरु श्रीस्वामी नारायणान्न्द जी महाराज परमहंस व श्री स्वामी सुरेशानन्द परमहंस व पिता बाबू राम मिश्र की प्रेरणा से ये भन्डार लगातार 25 वर्षों से निरन्तर जारी है।स्वामी जी के सान्निध्य मे आगे निरन्तंर आगे बढ रहा है।इस मौके पर संजय मिश्रा,शीलनिधि मिश्रा,रिषि मिश्रा,अंशुमान मिश्रा,अनंत मिश्रा,चन्दन मिश्रा,हर्षित मिश्रा आदर्श त्रिपाठी,अभिषेक त्रिपाठी व परिवार के लोग मौजूद।

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