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“राम जनमि जगु कीन्ह उजागर। रूप सील सुख सब गुन सागर॥”।

श्री राम जन्म व मारिक्ष वध एवं अहिल्या उद्धार तथा सीता स्वयंवर, परशुराम संवाद का हुआ मंचन महर्षि दधीचि की पौराणिक धरती पर भारतीय संस्कृति का इतिहास हुआ पुनः जागृत दीप प्रज्ज्वलित कर सांसद अशोक रावत, विधायक रामकृष्ण भार्गव, एम एल सी पवन सिंह, सी डि ओ प्रणता ऐश्वर्या ने किया रामलीला का शुभारंभ मिश्रिख / महर्षि दधीचि रामलीला न्यास मिश्रिख द्वारा मिश्रिख में सोमवार से ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली द्वारा रामलीला का मंचन दिव्य और भव्य शुभारंभ किया गया। रामलील में प्रभु श्री राम के जन्म पर गूंज उठा रामलीला परिसर मुख्य अतिथि सांसद अशोक रावत, क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव व एमएलसी पवन सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलित कर रामलीला का उद्घाटन किया। न्यास समिति के सदस्यों ने सांसद अशोक रावत , क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव व एमएलसी पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला का राजीव ओझा, रामबक्स सिंह, संजय राठौर देवेश पांडेय, भास्कर मिश्रा, फूल मालाओं और प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत सम्मान किया। कार्यक्रम में न्यास समिति के अध्यक्ष राजीव ओझा , संयोजक अधिवक्ता रामबक्स सिंह ने सीडीओ प्रणता ऐश्वर्या , डीपीआरओ निरीशचंद्र साहू ,एसडीएम शैलेन्द्र कुमार मिश्रा,कोतवाल अरविंद कुमार सिंह, व संत महात्माओं का स्वागत सम्मान किया। इस दौरान विधायक रामकृष्ण भार्गव ने कहा कि रामलीला के मंचन से लोगों में भगवान राम के प्रति सद्भावना उत्पन्न होती है।उन्होंने सभी से प्रभु श्री राम के आदर्शो पर चलने का आव्हान किया। इसके बाद रामलीला का श्री गणेश की मनमोहक झांकी से शुरू हुआ, जिसमें दर्शक लोग रामलीला देख मुग्ध हो गए। श्री महर्षि दधीचि रामलीला न्यास समिति के द्वारा आयोजित प्रथम रात्रि में रामलीला में राम जन्म और ताड़का वध का प्रभावशाली मंचन किया । ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली के कलाकारों ने राजा दशरथ और मंत्री सुमंत के बीच रघुवंश के उत्तराधिकारी की चिंता को लेकर मार्मिक संवाद हुआ। महारानी कौशल्या के मत के बाद राजा दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ से सलाह लेने पहुंचे। उन्हें श्रृंगी ऋषि के द्वारा पुत्रयज्ञ करवाने का परामर्श दिया। यज्ञ के बाद अग्निदेव की कृपा से राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। इससे अयोध्या में खुशियों की लहर दौड़ गई। इसके बाद विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए। मार्ग में राम और लक्ष्मण ने ताड़का का वध कर असुरों का विनाश किया। इसके बाद मंचन में विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचकर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण ने नगर की भव्यता काे देखा। पुष्पवाटिका में पहली बार माता सीता और श्रीराम का मिलन हुआ। ‎तदपश्चाद राजा जनक ने स्वयंवर की घोषणा की। इसमें शिव धनुष उठाने की शर्त रखी गई।मंचन में रावण की अहंकारपूर्ण उपस्थिति ने वातावरण को गंभीर बना दिया। श्रीराम ने सहज भाव से शिव धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष भंग हो गया। इसके बाद सीताजी ने श्रीराम को वरमाला पहनाई। भगवान श्रीराम के गले में माता सीता ने वरमाला डाली तो पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। देवताओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत संतोष दास खाकी ,ब्लॉक प्रमुख रामकिंकर पाण्डेय, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि मुनींद्र अवस्थी, गन्ना चीनी मिल के चेयरमेन रामगोपाल अवस्थी, हजारों दर्शक लोग मौजूद रहे। दानदाताओं ने किया खुल कर दान प्रथम बार हो रही रामलीला में सांसद अशोक रावत द्वारा 2 लाख एक हजार रुपए का दान दिया और कहा कि जब तक ईश्वर चाहेगा मैं इस रामलीला को आगे बढ़ाने के लिये दान देता रहूंगा। वहीं विधायक रामकृष्ण भार्गव ने 1 लाख 51 हजार रुपए का सहयोग किया, एम एल सी पवन सिंह ने भी 1 लाख 51 हजार रुपए का सहयोग किया , तथा औरंगाबाद निवासी सौकत अली उर्फ मोनू ने 1 लाख रुपये का सहयोग किया। गोंदलामऊ ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि मुनेन्द्र अवस्थी ने 51 हजार व अश्वनी कुमार सिंह द्वारा 51 हजार का सहयोग किया। उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र मिश्रा की प्रेरणा से पुनः शुरू हुई रामलीला ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली द्वारा मिश्रित नगर में रामलीला का दिव्य आयोजन बीस वर्ष बाद हुई शुरू जिसका पूरा श्रेय उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र मिश्रा व न्यास के अध्यक्ष राजीव ओझा, वरिष्ठ अधिवक्ता रामबक्स सिंह, मनोज पाण्डेय , अंकित शुक्ला, भास्कर मिश्रा, विवेक सिंह , देवेश पाण्डेय, अंकुर सिंह आदि कार्यकर्ता द्वारा कड़ी मेहनत करके आयोजन कराया जा रहा है। जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। पूरे क्षेत्र में इतनी बड़ी दिव्य व भव्य रामलीला का आयोजन कभी नहीं हुआ । सीता स्वयंवर देख मंत्र मुग्ध हुए श्रोता महर्षि दधीचि रामलीला न्यास द्वारा आयोजित रामलीला में सीता स्वयंवर आयोजन किया गया जिसमें राजा जनक द्वारा शिव धनुष पिनाक उठाने की शर्त रक्खी कि जो इस शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ायेगा उसी के साथ अपनी पुत्री सीता विवाह होगा। सभी देशों के राजाओं का निमंत्रण भेजा गया जिसमें लंका नरेश रावण को निमंत्रण नहीं भेजा गया जिससे नाराज रावण सभा में उपस्थित हुआ जिसमें सभी राजा भयभीत हो गए। बारी बारी से सभी राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया पर सभी विफल रहे जिससे राज जनक ने धरती पर सारे वीर हीन होने की बात कही जिससे लक्ष्मण जी कामी नाराज होकर गुरू की आज्ञा से पूरी धरती उठाने की बात कही जिससे गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा दी। श्री राम द्वारा धनुष उठाया गया तथा प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष भंग हो गया । जिसके बाद माता सीता द्वारा राम को वरमाला पहनाई गई और अयोध्या के लिए प्रस्थान किया "जब तें रामु ब्याहि घर आये। नितिन नव मंगल मोद बनाए।। भुवनु चारिदस भूधर भारी। सुकृति मेष बरषहि सुख भारी"।।

दीप प्रज्ज्वलित कर सांसद अशोक रावत, विधायक रामकृष्ण भार्गव, एम एल सी पवन सिंह, सी डि ओ प्रणता ऐश्वर्या ने किया रामलीला का शुभारंभ मिश्रिख / महर्षि दधीचि रामलीला न्यास मिश्रिख द्वारा मिश्रिख में सोमवार से ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली द्वारा रामलीला का मंचन दिव्य और भव्य शुभारंभ किया गया। रामलील में प्रभु श्री राम के जन्म पर गूंज उठा रामलीला परिसर मुख्य अतिथि सांसद अशोक रावत, क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव व एमएलसी पवन सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलित कर रामलीला का उद्घाटन किया। न्यास समिति के सदस्यों ने सांसद अशोक रावत , क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव व एमएलसी पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला का राजीव ओझा, रामबक्स सिंह, संजय राठौर देवेश पांडेय, भास्कर मिश्रा, फूल मालाओं और प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत सम्मान किया। कार्यक्रम में न्यास समिति के अध्यक्ष राजीव ओझा , संयोजक अधिवक्ता रामबक्स सिंह ने सीडीओ प्रणता ऐश्वर्या , डीपीआरओ निरीशचंद्र साहू ,एसडीएम शैलेन्द्र कुमार मिश्रा,कोतवाल अरविंद कुमार सिंह, व संत महात्माओं का स्वागत सम्मान किया। इस दौरान विधायक रामकृष्ण भार्गव ने कहा कि रामलीला के मंचन से लोगों में भगवान राम के प्रति सद्भावना उत्पन्न होती है।उन्होंने सभी से प्रभु श्री राम के आदर्शो पर चलने का आव्हान किया। इसके बाद रामलीला का श्री गणेश की मनमोहक झांकी से शुरू हुआ, जिसमें दर्शक लोग रामलीला देख मुग्ध हो गए। श्री महर्षि दधीचि रामलीला न्यास समिति के द्वारा आयोजित प्रथम रात्रि में रामलीला में राम जन्म और ताड़का वध का प्रभावशाली मंचन किया । ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली के कलाकारों ने राजा दशरथ और मंत्री सुमंत के बीच रघुवंश के उत्तराधिकारी की चिंता को लेकर मार्मिक संवाद हुआ। महारानी कौशल्या के मत के बाद राजा दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ से सलाह लेने पहुंचे। उन्हें श्रृंगी ऋषि के द्वारा पुत्रयज्ञ करवाने का परामर्श दिया। यज्ञ के बाद अग्निदेव की कृपा से राजा दशरथ को चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। इससे अयोध्या में खुशियों की लहर दौड़ गई। इसके बाद विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को अपने साथ ले गए। मार्ग में राम और लक्ष्मण ने ताड़का का वध कर असुरों का विनाश किया। इसके बाद मंचन में विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचकर प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण ने नगर की भव्यता काे देखा। पुष्पवाटिका में पहली बार माता सीता और श्रीराम का मिलन हुआ। ‎तदपश्चाद राजा जनक ने स्वयंवर की घोषणा की। इसमें शिव धनुष उठाने की शर्त रखी गई।मंचन में रावण की अहंकारपूर्ण उपस्थिति ने वातावरण को गंभीर बना दिया। श्रीराम ने सहज भाव से शिव धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष भंग हो गया। इसके बाद सीताजी ने श्रीराम को वरमाला पहनाई। भगवान श्रीराम के गले में माता सीता ने वरमाला डाली तो पूरा परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। देवताओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत संतोष दास खाकी ,ब्लॉक प्रमुख रामकिंकर पाण्डेय, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि मुनींद्र अवस्थी, गन्ना चीनी मिल के चेयरमेन रामगोपाल अवस्थी, हजारों दर्शक लोग मौजूद रहे। दानदाताओं ने किया खुल कर दान प्रथम बार हो रही रामलीला में सांसद अशोक रावत द्वारा 2 लाख एक हजार रुपए का दान दिया और कहा कि जब तक ईश्वर चाहेगा मैं इस रामलीला को आगे बढ़ाने के लिये दान देता रहूंगा। वहीं विधायक रामकृष्ण भार्गव ने 1 लाख 51 हजार रुपए का सहयोग किया, एम एल सी पवन सिंह ने भी 1 लाख 51 हजार रुपए का सहयोग किया , तथा औरंगाबाद निवासी सौकत अली उर्फ मोनू ने 1 लाख रुपये का सहयोग किया। गोंदलामऊ ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि मुनेन्द्र अवस्थी ने 51 हजार व अश्वनी कुमार सिंह द्वारा 51 हजार का सहयोग किया। उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र मिश्रा की प्रेरणा से पुनः शुरू हुई रामलीला ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली द्वारा मिश्रित नगर में रामलीला का दिव्य आयोजन बीस वर्ष बाद हुई शुरू जिसका पूरा श्रेय उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र मिश्रा व न्यास के अध्यक्ष राजीव ओझा, वरिष्ठ अधिवक्ता रामबक्स सिंह, मनोज पाण्डेय , अंकित शुक्ला, भास्कर मिश्रा, विवेक सिंह , देवेश पाण्डेय, अंकुर सिंह आदि कार्यकर्ता द्वारा कड़ी मेहनत करके आयोजन कराया जा रहा है। जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। पूरे क्षेत्र में इतनी बड़ी दिव्य व भव्य रामलीला का आयोजन कभी नहीं हुआ । सीता स्वयंवर देख मंत्र मुग्ध हुए श्रोता महर्षि दधीचि रामलीला न्यास द्वारा आयोजित रामलीला में सीता स्वयंवर आयोजन किया गया जिसमें राजा जनक द्वारा शिव धनुष पिनाक उठाने की शर्त रक्खी कि जो इस शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ायेगा उसी के साथ अपनी पुत्री सीता विवाह होगा। सभी देशों के राजाओं का निमंत्रण भेजा गया जिसमें लंका नरेश रावण को निमंत्रण नहीं भेजा गया जिससे नाराज रावण सभा में उपस्थित हुआ जिसमें सभी राजा भयभीत हो गए। बारी बारी से सभी राजाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया पर सभी विफल रहे जिससे राज जनक ने धरती पर सारे वीर हीन होने की बात कही जिससे लक्ष्मण जी कामी नाराज होकर गुरू की आज्ञा से पूरी धरती उठाने की बात कही जिससे गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की आज्ञा दी। श्री राम द्वारा धनुष उठाया गया तथा प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष भंग हो गया । जिसके बाद माता सीता द्वारा राम को वरमाला पहनाई गई और अयोध्या के लिए प्रस्थान किया "जब तें रामु ब्याहि घर आये। नितिन नव मंगल मोद बनाए।। भुवनु चारिदस भूधर भारी। सुकृति मेष बरषहि सुख भारी"।।

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