पंचकोसीय परिक्रमा के समापन पर दधीचि कुंड में भव्य आतिशबाजी, आस्था के उल्लास से जगमगाया आकाश

मिश्रिख, सीतापुर:
मिश्रिख नैमिषारण्य की पावन धरा पर चल रहे सुप्रसिद्ध चौरासी कोसीय होली परिक्रमा मेले के अंतर्गत, पंचकोसीय परिक्रमा के अंतिम दिन मिश्रिख में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। महर्षि दधीचि की तपोस्थली पर अंतिम पड़ाव के साथ ही दधीचि कुंड पर देर रात हुई भव्य आतिशबाजी ने उत्सव की भव्यता में चार चाँद लगा दिए। तीर्थ पुरोहित हितकारी संस्थान द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष की महर्षि दधीचि की महा आरती का आयोजन किया। जिसमें मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव, विकास हिन्दू , उपजिलाधिकारी मिश्रित अभिनव , मेला अधिकारी जनार्दन, तहसीलदार अजीत जयसवाल नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अजय भार्गव आदि लोग मौजूद रहे ।

श्रद्धा का सैलाब और आतिशबाजी का प्रदर्शन
पंचकोसीय परिक्रमा के अंतिम दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु मिश्रिख पहुंचे। मान्यता है कि परिक्रमा के पूर्ण होने पर दधीचि कुंड में स्नान और दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। इस अवसर पर कुंड परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। जैसे ही आतिशबाजी शुरू हुई, रॉकेटों और रंग-बिरंगे पटाखों से आसमान सतरंगी हो उठा, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
परिक्रमा का समापन: चौरासी कोसीय परिक्रमा के बाद पंचकोसीय परिक्रमा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने अपना संकल्प पूर्ण किया।
दधीचि कुंड का महत्व: महर्षि दधीचि के अस्थि दान की साक्षी रही इस भूमि पर होली के इस उत्सव को विजय और त्याग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
प्रशासनिक सतर्कता: भारी भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल और मेला प्रशासन मुस्तैद रहा।
भक्ति और उल्लास की होली
कुंड के चारों ओर साधु-संतों और श्रद्धालुओं की टोली ने लोक गीतों और भजनों पर नृत्य किया। आतिशबाजी का यह नजारा देखने के लिए लोग छतों और कुंड के घाटों पर डटे रहे। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस वर्ष की आतिशबाजी परिक्रमा मेले के इतिहास की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में से एक रही।



