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रामलीला के दूसरे दिन का मंचन देख श्रोता हुए मंत्रमुग्ध 

चीफअपूर्व पाण्डेय 

दशरथ कैकेई संवाद तथा राम वनवास, दशरथ मरण, भरत मिलाप का हुआ मंचन 

दूसरे दिन के कार्यक्रम का शुभारंभ नगरपालिका अध्यक्ष सीमा भार्गव द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया 

 

मिश्रिख / महर्षि दधीचि रामलीला न्यास मिश्रिख द्वारा मिश्रिख में सोमवार से ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली द्वारा रामलीला का मंचन दिव्य और भव्य कार्यक्रम चल रहा है । जिसमें कार्यक्रम के दूसरे दिन रामलीला में महाराज दशरथ व महारानी कैकेई के बीच संवाद का मंचन किया गया जिसमें मंथरा के बहकावें में आ कर महारानी कैकेई ने महराज दशरथ से राम को चौदह बरस का वनवास तथा युवराज भरत को राज्य देने के दो वचन मांगें जिससे महराज दशरथ असहज होकर वचन देने को मजबूर हुए जिसके बाद अयोध्या नगर वासियों ने नम आंखों से प्रभू श्री राम को वनवास भेजा वनवास जाते समय मार्ग में निषाद राज मिलन, केवट प्रंसग का मंचन किया गया। तथा राम वियोग में महराज दशरथ के प्राण छोड़ते समय आकाश वाणी में श्रवण कुमार के माता पिता द्वारा दिये गये श्राप की आकाशवाणी हुई जिसके बाद महराज दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए जिसके बाद ननिहाल गये युवराज भरत को बुलाया गया उनके आने के बाद भरत का मन आहत हुआ जिसके बाद वो प्रभु श्री राम से मिलने वन को नीकल पड़े । कार्यक्रम में न्यास अध्यक्ष राजीव ओझा, संयोजक रामबक्स सिंह, मनोज पाण्डेय, अंकित शुक्ला भास्कर मिश्रा, आदि पूरा न्यास सदस्यों के द्वारा फूल मालाओं और प्रतीक चिन्ह देकर नगरपालिका अध्यक्ष सीमा भार्गव व उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार मिश्रा को सम्मानित किया गया।

भरत मिलाप का हुआ मंचन

ब्राइट फ्यूचर एकेडमी दिल्ली द्वारा मिश्रित नगर में रामलीला का दिव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसके क्रम में भरत मिलाप के मंचन ने श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। तथा सभी की आंखे नम हो गई। युवराज भरत द्वारा वन में राम को अयोध्या वापस चलने की जिद पर अड गये जिससे राम द्वारा पिता के वचनों को पूरा करने का निर्णय किया तथा गुरु वसिष्ठ के आदेश पर भरत ने राम की चरण पादुकाओं से राज्य पाठ संचालित करने का निर्णय लिया।

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